दिल्ली के जंतर‑मंतर पर शनिवार को छात्र प्रदर्शन के मंच पर उत्तराखंड के एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने सार्वजनिक रूप से अपना बैज उतारकर उसे प्रदर्शन के नेता के हवाले करते हुए कहा कि वह पुलिस सेवा छोड़ रहा है और राज्य में चल रही भर्ती‑परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ खड़ा है। इस दौरान कॉन्स्टेबल ने आरोप लगाया कि पटवारी जैसे परीक्षा‑प्रश्न ‘परचून की दुकान’ में भी मिलते हैं; इसका वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से शेयर हुआ। (indianexpress.com)
उत्तराखंड पुलिस ने इस घटना पर कानूनी तथा विभागीय कार्रवाई शुरू करने की जानकारी दी और बताया कि जिस कॉन्स्टेबल का नाम शेर सिंह बताया जा रहा है उसे पहले से ही निलंबित किया गया था। पुलिस के मुताबिक उसे 20 जुलाई 2026 को सस्पेंड किया गया था क्योंकि वह लंबे समय से बिना अनुमति के अनुपस्थित था; उसी मामले में छेड़‑छाड़ और अन्य गंभीर आरोपों पर बर्खास्तगी की कार्रवाई चल रही थी। (indiatoday.in)
कुमाऊं रेंज की आईजी निबेदिता कुकरेती ने मीडिया को बताया कि शेर सिंह पिथौरागढ़ में तैनात था, उस पर 2025 में दर्ज एक एफआईआर के सिलसिले में उसे गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत मिली। पुलिस ने आरोप लगाया है कि शेर सिंह का नाम कुछ जमीन‑कब्ज़ा और साझा आपराधिक गिरोह से संबंधित विवरणों में भी आया था; इसी कारण विभागीय और दंडात्मक प्रक्रियाएँ पहले से चल रही थीं। (indiatoday.in)
प्रदर्शन स्थल पर शेर सिंह के भाषण और बैज सौंपने के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशासन ने कहा कि सार्वजनिक मंच से दिए गए ऐसे बयानों की जांच की जा रही है और सोशल मीडिया में फैल रही क्लिपों की सत्यता पर भी नजर रखी जा रही है। प्रदर्शन के वीडियो और पोस्ट‑शेयरिंग ने मामले को ऑनलाइन बहस का विषय बना दिया है। (abplive.com)
स्थानीय मीडिया और एजेंसी रिपोर्टों के अनुसार, उत्तराखंड पुलिस ने शेर सिंह के हालिया बयानों के मद्देनजर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन दिया है और कहा है कि निलंबन तथा लंबित बर्खास्तगी‑प्रक्रियाएँ जारी हैं; इसे लेकर आगे की रिपोर्टें पुलिस मुख्यालय भेजी जा रही हैं। (indiatoday.in)
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