नैनीताल उच्च न्यायालय ने यूकेएसएसएससी के माध्यम से भरी जा रही 751 सरकारी पदों में राज्य‑आंदोलनकारी कोटे के तहत चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी है, और राज्य सरकार व आयोग से इस पर छह सप्ताह में विस्तृत जवाब मांगा है, एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार।
कोर्ट की एकल पीठ—जस्टिस पंकज पुरोहित—ने हरिद्वार निवासी याचिकाकर्ता सक्षम चौहान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि भर्ती विज्ञापन जारी होने और आवेदन की अंतिम तिथि के बाद पात्रता शर्तों में किए गए बदलावों की युक्ति पर स्पष्टता चाहिए, और तब तक 15 जुलाई के पहले लगे रोक के आदेश को अगले आदेश तक बढ़ा दिया गया है, लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि 4 नवंबर 2024 को जारी विज्ञापन और 1 नवंबर 2024 की अंतिम तिथि के बाद राज्य शासन ने 1 जुलाई 2026 का शासनादेश जारी कर उन अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन में शामिल होने की अनुमति दी जिनके आवेदन के साथ मूल रूप से राज्य‑आंदोलनकारी प्रमाणपत्र संलग्न नहीं था; याचिका में यह तर्क दिया गया है कि भर्ती प्रक्रिया के बीच में शर्तें बदलना अनुचित है, एबीपी/एएनआई ने यह विवरण उद्धृत किया है।
सूत्रों के अनुसार, आयोग ने अदालत में आर्ग्यू किया कि राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों पर वैसा ही विचार किया जा सकता है जैसा अनुसूचित जाति‑जनजाति के वंशजों पर होता है, लेकिन न्यायालय ने यह तर्क खारिज करते हुए कहा कि आरक्षण का लाभ लेने के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र समय पर प्रस्तुत किए जाना अनिवार्य है; दोनों समाचार एजेंसियों ने इस बिंदु को उद्धृत किया है।
अदालत ने राज्य सरकार और यूकेएसएसएससी को यह स्पष्ट करने को कहा कि 1 जुलाई 2026 का शासनादेश किस कानूनी प्रावधान के तहत जारी किया गया था और सभी पक्षों को छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए; अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 के लिए तय की गई है, लोकल मीडिया रिपोर्ट के अनुसार।
स्रोत: www.abplive.com · www.livehindustan.com




