उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पवित्र श्रावण मास के अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम अपनी विशेष पाती (‘योगी की पाती’) जारी की है। इसमें उन्होंने नागरिकों से श्रावण मास को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखकर इसे जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन, स्वच्छता, सेवा और सामाजिक समरसता का व्यापक जनअभियान बनाने का आह्वान किया है। सोशल मीडिया और आधिकारिक माध्यमों से जारी इस संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जनसहभागिता ही विकसित उत्तर प्रदेश की आधारशिला है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में जल संरक्षण को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि पंचतत्वों में जल जीवन का मूल आधार है। राज्य सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में अब तक लगभग 20 हजार ‘अमृत सरोवर’ विकसित किए जा चुके हैं, जो भूजल स्तर सुधारने और जल संचयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि जलवायु परिवर्तन के दौर में प्रकृति से जितना उपयोग किया जाए, उतना ही उसे वापस लौटाने का संकल्प लेना आवश्यक है।
संदेश में मुख्यमंत्री ने राजधानी लखनऊ की एक आवासीय सोसाइटी की अनुकरणीय पहल का विशेष रूप से उल्लेख किया, जहां प्रतिदिन आरओ (RO) और एयर कंडीशनर से निकलने वाले लगभग 50 हजार लीटर पानी को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से जोड़कर भूजल पुनर्भरण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने ‘हर बूंद का सम्मान और हर पौधे का संरक्षण’ का नारा देते हुए कहा कि सामूहिक श्रम और जनभागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
‘योगी की पाती’ में सनातन संस्कृति और प्रकृति संरक्षण के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा कि श्रावण मास में भगवान शिव को जल अर्पित करने की परंपरा त्याग, कृतज्ञता और लोककल्याण का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में धान रोपाई के बाद होने वाला सामूहिक सहभोज और शिवालयों में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की कतारें सामाजिक एकजुटता का प्रतीक हैं। प्रदेश सरकार के आधिकारिक सूचना विभाग के अनुसार, इस संदेश के साथ ही राज्य भर में जल संरक्षण और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए जिला स्तर पर जन-जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
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