देहरादून स्थित उत्तराखंड विधानसभा में सोमवार, 3 अगस्त 2026 को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण) के क्रियान्वयन पर चर्चा के लिए एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया गया। सत्र के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण शीघ्र लागू करने के समर्थन में सर्वसम्मति से संकल्प प्रस्ताव पारित करने का प्रस्ताव सदन के पटल पर रखा।
आकाशवाणी समाचार की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया यह अधिनियम देश की आधी आबादी को विधायी और राजनीतिक प्रक्रियाओं में उचित प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। सीएम धामी ने विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने संसद में संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन नहीं किया था और अब परिसीमन प्रक्रिया को लेकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से दलीय हित से ऊपर उठकर महिला सशक्तीकरण के मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया।
दूसरी तरफ, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार के प्रस्ताव पर पलटवार करते हुए कहा कि केवल सीटों की संख्या बढ़ाने से महिलाओं का वास्तविक सशक्तीकरण नहीं होगा। उन्होंने आरक्षण लागू करने के लिए प्रस्तावित जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया की समयावधि पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दिया। नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि उत्तराखंड में वर्ष 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव से ही महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए।
विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित इस विशेष सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई विधायकों ने अपने विचार रखे। बहस समाप्त होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूड़ी भूषण ने सदन की औपचारिक कार्यवाही पूरी की, जिसमें राज्य की ओर से केंद्र सरकार को इस कानून को जल्द लागू करने का प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई。
स्रोत: newsonair.gov.in · indiatimes.com




