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किशाऊ परियोजना: 6 राज्यों के बीच ऐतिहासिक समझौता, टोंस नदी पर बनेगा 232 मीटर ऊंचा बांध

उत्तराखंड और हिमाचल की सीमा पर बनने वाली किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना पर 6 राज्यों ने ऐतिहासिक MoU साइन किया। अमित शाह की मौजूदगी में हुए करार से 422 मेगावाट बिजली और सिंचाई का रास्ता साफ हुआ।

फोटो साभार: indiatoday.in

नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की उपस्थिति में 15 सितंबर को किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के क्रियान्वयन के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हस्ताक्षर किए। 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना के माध्यम से दशकों से लंबित अंतरराज्यीय जल विवाद का निपटारा हुआ है।

सरकारी बयान और आधिकारिक डेटा के अनुसार, किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर निर्मित की जाएगी, जो कि यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदी है। परियोजना के तहत 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया जाएगा, जिसमें लगभग 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर जल के भंडारण की क्षमता होगी। इस विशाल जल भंडार से छह भागीदार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश को पेयजल और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे लगभग 97,000 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित हो सकेगी।

गृह मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह वर्ष 2014 के बाद से केंद्र सरकार के प्रयासों से सुलझाया गया 10वां अंतरराज्यीय जल विवाद है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के क्रियान्वयन से यमुना नदी के पर्यावरणीय प्रवाह में सुधार होगा और कुल संचित जल का 25 प्रतिशत हिस्सा यमुना में छोड़े जाने से दिल्ली में पेयजल की किल्लत दूर होगी तथा नदी के पुनरुद्धार अभियान को गति मिलेगी।

वित्तीय व्यवस्था के तहत, किशाऊ परियोजना के जल घटक की कुल लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, जबकि शेष 10 प्रतिशत खर्च को सभी भागीदार राज्य आपस में साझा करेंगे। परियोजना से 422 मेगावाट क्षमता का जलविद्युत संयंत्र भी स्थापित किया जाएगा, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को ऊर्जा घटक से होने वाली आय और बिजली का सीधा लाभ मिलेगा।

स्रोत: theprint.in · www.indiatoday.in · www.gnttv.com