उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने राज्य में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) के प्रावधानों के अनुरूप नया ‘निकाहनामा’ (विवाह अनुबंध) का प्रारूप तैयार किया है, जिसके तहत बहुविवाह प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया है। इस नए मॉडल निकाहनामे में दूसरी, तीसरी या चौथी शादी के विकल्पों वाले कॉलम को हटा दिया गया है। वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए इसे पर्सनल लॉ मामलों में अनुचित हस्तक्षेप करार दिया है।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लागू यूसीसी को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। नए निकाहनामे के मसौदे में केवल एक विवाह की कानूनी अनुमति दी गई है। इसके अलावा, निकाहनामे में ‘हलाला’ प्रथा पर पूर्ण रोक, केवल विवाह के उद्देश्य से किए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर पाबंदी और निकाह संपन्न कराने वाले मौलवियों व काजियों का अनिवार्य पंजीकरण शामिल है। व्यवस्था के तहत केवल पंजीकृत काजी ही निकाह पढ़ा सकेंगे, जिन्हें एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूनिक आईडी) आवंटित की जाएगी।
दूसरी ओर, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने इस पहल पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट एक वैध कानून है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब यूसीसी से जुड़ी याचिकाएं उत्तराखंड उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं, तब तक वक्फ बोर्ड को निकाहनामे में कोई बदलाव करने का अधिकार नहीं है। पर्सनल लॉ बोर्ड ने घोषणा की है कि वह यूसीसी और व्यक्तिगत कानूनों में बदलाव के प्रयासों के खिलाफ 17 सितंबर से दिल्ली के जंतर-मंतर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेगा।
प्रस्तावित मसौदे के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन के बाद विवाह करना चाहता है, तो उसे अनिवार्य रूप से विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके अतिरिक्त, विवाह पंजीकरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए डिजिटल सत्यापन की व्यवस्था भी जोड़ी जा रही है। वक्फ बोर्ड के अधिकारियों और यूसीसी ड्राफ्टिंग समिति के सदस्यों के बीच इस प्रारूप की समीक्षा के लिए 9 सितंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसके बाद अंतिम मसौदा राज्य सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा।
स्रोत: timesofindia.indiatimes.com · ndtv.in




