उत्तराखंड में आगामी 2027 विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान राज्य भर से 12,209 वास्तविक आपत्ति आवेदन दर्ज किए गए हैं। हालांकि, आपत्तियों के पैटर्न और कुछ विशिष्ट नामों से दर्जनों आवेदन जमा होने के बाद राजनीतिक दलों के बीच घमासान छिड़ गया है।
ईटीवी भारत और गढ़वाल पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, कुल दर्ज 12,209 आपत्तियों में से सबसे अधिक 156 आपत्ति आवेदन ‘नितिन’ नाम से पंजीकृत हुए हैं, जो मुख्य रूप से उधम सिंह नगर जिले के जसपुर और किच्छा विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित हैं। आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि केवल 10 व्यक्तियों या नामों द्वारा कुल 1,124 आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं, जो कुल आपत्तियों का लगभग 9.2 प्रतिशत हिस्सा है। इनमें विनीत गिरि गोसाईं द्वारा 126, कार्तिक घीक द्वारा 125, अशोक प्रसाद द्वारा 113 और अभिषेक तिवारी द्वारा 104 आपत्तियां शामिल हैं।
विधानसभा क्षेत्रवार स्थिति देखी जाए तो उधम सिंह नगर जिले का जसपुर विधानसभा क्षेत्र 3,896 आपत्तियों के साथ शीर्ष पर है, जबकि किच्छा में 2,857 और काशीपुर में 1,489 आपत्तियां दर्ज हुई हैं। उधम सिंह नगर की सात और हरिद्वार जिले की तीन विधानसभा सीटों को मिलाकर कुल 11,339 आपत्तियां दर्ज की गई हैं, जो राज्य की कुल आपत्तियों का लगभग 93 प्रतिशत हैं। इसके अलावा, 879 आवेदनों में आपत्ति दाखिल करने वाले और संबंधित मतदाता का नाम एक ही दर्ज पाया गया है।
आपत्तियों के इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता आमेंद्र बिष्ट ने आरोप लगाया है कि बीजेपी और चुनाव आयोग एक रणनीति के तहत फर्जी आपत्तियां लगाकर वास्तविक मतदाताओं के नाम काटने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस ने दावा किया कि विपक्षी समर्थकों को चुनाव प्रक्रिया से बाहर करने के उद्देश्य से एक ही नाम से दर्जनों शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि विपक्षी दल आगामी चुनाव में हार की आशंका से निराधार आरोप लगा रहा है। बीजेपी नेताओं के अनुसार SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी बनाना है।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 12,209 आपत्तियों में से सर्वाधिक 8,166 आपत्तियां ‘अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित’ श्रेणी के मतदाताओं से संबंधित हैं। इसके अतिरिक्त 2,872 आपत्तियां ‘पहले से पंजीकृत’ होने, 730 आपत्तियां स्थायी रूप से स्थान बदलने, 286 आपत्तियां मृतक मतदाताओं और 110 आपत्तियां कम उम्र के मतदाताओं के आधार पर दर्ज की गई हैं।
स्रोत: www.etvbharat.com · garhwalpost.in




