उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार से सैन्य बलों में अग्निवीर भर्ती योजना को तत्काल वापस लेने की मांग की है। देहरादून स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के प्रमुख हरक सिंह रावत ने इस योजना को राज्य के युवाओं और पारंपरिक सैन्य परंपरा के लिए नुकसानदायक करार दिया।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि उत्तराखंड से लगभग 4,500 अग्निवीर अपनी चार साल की सेवा अवधि पूरी कर जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की गौरवशाली सैन्य परंपरा रही है, जहां पर्वतीय जिलों के हजारों परिवार पीढ़ियों से सेना की नौकरी को अपनी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का आधार मानते आए हैं। उन्होंने मांग की कि 4 वर्ष की सेवा के बाद लौटने वाले युवाओं के लिए केंद्र और राज्य सरकार को स्पष्ट पुनर्वास नीति और स्थाई रोजगार योजना की घोषणा करनी चाहिए।
पायनियर एज की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने कहा कि चार साल का सेवाकाल युवाओं के भविष्य में अनिश्चितता पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड एक सैनिक-बाहुल्य राज्य है जहां लगभग हर घर से सेना से जुड़ाव रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस व्यवस्था के चलते युवाओं का सेना के प्रति पारंपरिक रुझान प्रभावित हो रहा है।
कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) राम रतन नेगी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए नेताओं ने कहा कि पहले हर साल औसतन 80,000 युवाओं को सेना में अवसर मिलता था, जो अब घटकर लगभग 47,000 रह गया है। इनमें से भी केवल 25 प्रतिशत यानी लगभग 12,000 युवाओं को ही स्थाई रूप से सेवा में रखा जाएगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मांग की कि पहले बैच के सेवानिवृत्त हो रहे अग्निवीरों की सेवाओं को नियमित किया जाना चाहिए और पुरानी भर्ती प्रणाली को फिर से लागू किया जाना चाहिए।
स्रोत: www.newindianexpress.com · pioneeredge.in




