केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 2029 से पहले सभी 21 एनडीए शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के ऐलान पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कड़ा ऐतराज जताया है। नई दिल्ली में समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए हरीश रावत ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का शासन और विकास के मुद्दों से भरोसा उठ चुका है, जिसके चलते वह चुनाव जीतने के लिए फिर से सामाजिक ध्रुवीकरण के रास्ते पर लौट रही है।
हरीश रावत ने कहा कि एनडीए शासित राज्यों में यूसीसी लागू करने की घोषणा यह दर्शाती है कि केंद्र और राज्यों की भाजपा सरकारें जनकल्याण, विकास और रोजगार के मोर्चे पर अपनी उपलब्धियों के दम पर जनता के बीच जाने का आत्मविश्वास खो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब भाजपा का चुनावी आत्मविश्वास डगमगाता है, वह सामाजिक विभाजन पैदा करने वाले मुद्दों को आगे बढ़ाने लगती है। उन्होंने तर्क दिया कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में सामाजिक सुधार किसी कानून को थोपने के बजाय संवाद और परामर्श से ही संभव हैं।
उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य में यूसीसी लागू होने के बाद पारंपरिक विवाह व्यवस्था प्रभावित हुई है। उनके अनुसार, इस कानून के तहत लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीकरण जैसे प्रावधानों पर ध्यान केंद्रित करने से सनातन परंपराओं और सामाजिक ताने-बाने पर विपरीत असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि देश की विविध संस्कृतियों का सम्मान किया जाना चाहिए तथा सामाजिक सुधारों की प्रक्रिया संबंधित समुदायों की सहमति से आगे बढ़नी चाहिए।
इससे पहले, 13 सितंबर को मुंबई में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अवसर पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की थी कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पूर्व सभी 21 एनडीए शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता को लागू कर दिया जाएगा। वर्तमान में उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां विधानसभा से विधेयक पारित होने के बाद यूसीसी लागू किया गया है।
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