देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर आयोजित हुआ। सदन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार द्वारा पारित इस अधिनियम के शीघ्र क्रियान्वयन के समर्थन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करने का आह्वान किया, जबकि विपक्ष के नेता यशपाल आर्य ने परिसीमन प्रक्रिया की आड़ में देरी का आरोप लगाते हुए 2027 चुनाव से पहले इसे लागू करने की मांग की।
सदन की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया 131वां संवैधानिक संशोधन देश की आधी आबादी को उनका उचित राजनीतिक अधिकार देने के लिए है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल इस संवेदनशील मुद्दे पर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने सभी दलों से दलीय प्राथमिकताओं से ऊपर उठकर महिला सशक्तिकरण के समर्थन में स्पष्ट और सकारात्मक रुख अपनाने की अपील की।
दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता यशपाल आर्य ने सरकार के रुख का विरोध करते हुए कहा कि केवल सीटों की संख्या बढ़ाने से महिलाओं का वास्तविक सशक्तिकरण संभव नहीं है। उन्होंने महिला आरक्षण को आगामी जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक मंशा से प्रेरित बताया। आर्य ने मांग की कि केंद्र और राज्य सरकार बिना परिसीमन की प्रतीक्षा किए 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू करे और उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव में ही इसे प्रभावी बनाया जाएI
विशेष सत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच बहस के बाद मुख्यमंत्री धामी ने सदन के समक्ष प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि राज्य में पूर्व में भी त्रिस्तरीय पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, और यह विशेष सत्र महिला अधिकारों के लिए राज्य की प्रतिबद्धता को दोहराने के उद्देश्य से आयोजित किया गया थाI
स्रोत: newsonair.gov.in · www.hindustantimes.com




