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Politics

हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद: नैनीताल पुलिस ने दर्ज की पहली FIR, BNS और SC/ST एक्ट में जांच शुरू

हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित शुद्धिकरण मामले में नैनीताल पुलिस ने SC/ST एक्ट और BNS की धाराओं में पहली FIR दर्ज की है। मामले की जांच एसपी क्राइम को सौंपी गई है।

प्रतीकात्मक चित्र

उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद आयोजित कथित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान के मामले में नैनीताल पुलिस ने पहली आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। 8 सितंबर को हल्द्वानी कोतवाली पुलिस ने स्थानीय अधिवक्ता एवं कांग्रेस कार्यकर्ता अंजू की लिखित शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। यह कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत की गई है।

मामले के विवरण के अनुसार, 8 अगस्त को हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक रैली को संबोधित किया था। इसके पश्चात 11 अगस्त को श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के बैनर तले कुछ लोगों ने मंच पर हवन यज्ञ का आयोजन कर गंगाजल छिड़का था। इस अनुष्ठान का वीडियो सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने इसे दलित वर्ग के नेता का अपमान और असंवैधानिक प्रथा का रूप करार दिया था। दूसरी ओर, अनुष्ठान करने वाले आयोजकों ने किसी भी तरह के जातिगत पूर्वाग्रह से इनकार करते हुए इसे पूरी तरह से धार्मिक अनुष्ठान बताया था।

नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मंजूनाथ टीसी ने मीडिया को बताया कि पुलिस को इस प्रकरण के संबंध में राज्य के विभिन्न हिस्सों से 80 से अधिक आवेदन और शिकायत पत्र मिले थे, जिनमें अकेले नैनीताल जिले के 19 आवेदन शामिल थे। प्राथमिक जांच और कानूनी राय लेने के बाद, सबसे पहले आवेदन देने वाली शिकायतकर्ता के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई। एसएसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी विवेचना पुलिस अधीक्षक (अपराध) जगदीश चंद्र को सौंपी है, जो सभी वायरल वीडियो साक्ष्यों और गवाहों के बयानों की जांच करेंगे।

कानूनी व राजनीतिक घटनाक्रम के तहत, इस मुद्दे पर बेंगलुरु में भी पूर्व में एक ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज हुई थी, जबकि हल्द्वानी में राहुल गांधी के बयानों को लेकर भी एक अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। इस बीच, कांग्रेस के दलित व आदिवासी सांसदों ने संसदीय मंच बनाकर राष्ट्रपति भवन में प्रतिनिधित्व देने का निर्णय लिया है और पार्टी ने 12 सितंबर को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर राष्ट्रव्यापी धरना देने का कार्यक्रम तय किया है।

स्रोत: www.thehindu.com · www.etvbharat.com