लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत आने वाले 14,429 प्राथमिक विद्यालयों को ‘स्मार्ट स्कूल’ के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के क्रियान्वयन के लिए सरकार ने कुल 300 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है।
राज्य के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि इस योजना के तहत चयनित प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय को 2,07,910 रुपये की धनराशि आवंटित की जाएगी। इस बजट से विद्यालयों में 65 इंच तक के इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल, पावर बैकअप सिस्टम, ऑडियो-विजुअल शिक्षण सामग्री और कक्षा 1 से 5 तक के संपूर्ण पाठ्यक्रम का डिजिटल कंटेंट उपलब्ध कराया जाएगा।
परियोजना को पारदर्शी और सुचारू रूप से लागू करने के लिए राज्य सरकार ने ‘श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड’ को कार्यदायी संस्था नामित किया है। संस्था द्वारा प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से स्मार्ट क्लास और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) लैब स्थापित की जाएंगी। इसके साथ ही, उपकरण प्रबंधन, हेल्प डेस्क संचालन और तकनीकी सहायता के लिए राज्य स्तर पर एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट का गठन किया जाएगा।
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 32,000 से अधिक परिषदीय स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज संचालित हो रही हैं, जबकि 15,000 से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब्स और 1,129 स्कूलों में डिजिटल पुस्तकालय स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, प्रदेश के 2.61 लाख से अधिक शिक्षकों को शिक्षण कार्यों के लिए टैबलेट भी उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने स्पष्ट किया कि यदि निविदा प्रक्रिया में प्रति स्कूल लागत तय मानक से कम आती है, तो कुल स्वीकृत 300 करोड़ रुपये के बजट के भीतर ही योजना में और अधिक प्राथमिक विद्यालयों को शामिल किया जाएगा।
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