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उत्तराखंड: रोपवे परियोजनाओं में देरी पर भड़के सीएम धामी, कार्यदायी संस्थाओं को 15 दिन का अल्टीमेटम

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में प्रस्तावित 50 रोपवे परियोजनाओं की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को 15 दिनों में प्रगति रिपोर्ट पेश करने का अल्टीमेटम दिया है।

फोटो साभार: thestatesman.com

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की धीमी गति पर गहरी नाराजगी जताई है। सोमवार को देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 9 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस तक सभी प्रमुख रोपवे परियोजनाओं का काम धरातल पर नजर आना चाहिए।

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने सभी कार्यदायी संस्थाओं को अगले 15 दिनों के भीतर अपनी अद्यतन प्रगति रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि कागजी औपचारिकताओं में हो रही देरी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और तय समय सीमा के अनुसार काम पूरा करना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रगति रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद वह स्वयं दोबारा इन परियोजनाओं की गहन समीक्षा करेंगे।

बैठक में केंद्र सरकार की ‘पर्वतमाला योजना’ के तहत प्रस्तावित 50 रोपवे परियोजनाओं के साथ-साथ राज्य स्तर की प्रमुख योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इनमें सोनप्रयाग-केदारनाथ, गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब, काठगोदाम-नैनीताल, देहरादून-मसूरी, जानकीचट्टी-यमुनोत्री, टनकपुर-पूर्णागिरि और कनकचौरी-कार्तिक स्वामी रोपवे शामिल हैं। इसके अतिरिक्त हरिद्वार और ऋषिकेश क्षेत्र में प्रस्तावित एकीकृत रोपवे परियोजनाओं की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन भूमि हस्तांतरण, भूमि अधिग्रहण और विभिन्न विभागीय स्वीकृतियों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर आपसी समन्वय से सुलझाया जाए। उन्होंने निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए लाइसेंसिंग और मंजूरी की प्रक्रियाओं को पारदर्शी व सरल बनाने पर जोर दिया। राज्य सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में यातायात सुगम बनाने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विशेष ध्यान दे रही है।

समीक्षा के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में निर्माणाधीन और प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया। सरकारी बयान के अनुसार, 15 दिनों में कार्यदायी संस्थाओं द्वारा सौंपी जाने वाली प्रगति रिपोर्ट के आधार पर मुख्य सचिव स्तर पर अगली समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।

स्रोत: www.thestatesman.com · www.aninews.in · indianmasterminds.com