भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने हैदराबाद स्थित नालसार (NALSAR) विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के निमंत्रण को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। मीडिया को दिए साक्षात्कार में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उन्होंने नालसार के निमंत्रण पर कभी सहमति नहीं दी थी, इसलिए वहां जाने का प्रश्न ही नहीं उठता। यह बयान विश्वविद्यालय के 400 से अधिक छात्रों द्वारा सीजेआई की उपस्थिति का विरोध किए जाने और उसके बाद भारतीय बार काउंसिल (बीसीआई) के रुख को लेकर उपजे राष्ट्रव्यापी विवाद के बीच आया है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब नालसार विश्वविद्यालय के 1,400 में से करीब 400 छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र भेजकर सीजेआई को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित करने पर पुनर्विचार की मांग की थी। छात्रों ने 20 जुलाई को दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों का हवाला दिया था। इसके बाद बीसीआई के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने 13 अगस्त को एक आदेश जारी कर सभी राज्य बार कौंसिलों को नालसार के 2026 बैच के स्नातकों का वकील के रूप में पंजीकरण रोकने का निर्देश दे दिया था।
बीसीआई के इस निर्णय पर कानूनी बिरादरी और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआई की अगुआई वाली पीठ ने बीसीआई के कदम पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह छात्रों और न्यायपालिका के बीच का संवाद है। चौतरफा विरोध और शीर्ष अदालत के रुख के बाद बीसीआई ने कुछ ही घंटों में पंजीकरण पर रोक का फैसला वापस ले लिया था और अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने विद्यार्थियों से खेद जताया था।
इस मामले में नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) बेंगलुरु के छात्रों और पूर्व छात्रों ने भी नालसार के विद्यार्थियों के समर्थन में बयान जारी किया है। एनएलएसआईयू के 165 अंतिम वर्ष के छात्रों, 409 वर्तमान विद्यार्थियों और 128 पूर्व छात्रों के हस्ताक्षर वाले एक खुले पत्र में बीसीआई की पूर्व कार्रवाई की निंदा की गई है। पत्र में कहा गया है कि किसी वैधानिक निकाय द्वारा छात्रों की असहमति को दबाने के लिए व्यक्तिगत और पेशेवर नुकसान की धमकी देना अनुचित है।
भारतीय बार काउंसिल ने इस मामले में नालसार विश्वविद्यालय प्रशासन से विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है। काउंसिल के आधिकारिक पत्र के अनुसार, कुलपति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद 19 अगस्त 2026 को इस विषय पर आगे की विचार-विमर्श की जाएगी।
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