अमेरिका के एक सुपरमार्केट (कॉस्टको) में खरीदारी के दौरान केरल के पारंपरिक लोक नृत्य ‘थिरुवाथिरकली’ (Thiruvathirakali) का अभ्यास करती एक भारतीय महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर प्रसारित इस वीडियो को अब तक 17 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। वीडियो के सामने आने के बाद सार्वजनिक स्थानों पर व्यक्तिगत आचरण और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की सीमाओं को लेकर इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच एक नई बहस छिड़ गई है।
वायरल क्लिप में महिला सुपरमार्केट की ट्रॉली के साथ गलियारे में घूमते हुए नृत्य के पारंपरिक कदम उठाती हुई दिखाई दे रही है। वीडियो पर टेक्स्ट लिखा है, ‘जब खरीदारी करते समय भी आपके दिमाग पर थिरुवाथिरकली के अभ्यास का खुमार पूरी तरह छाया हो।’ थिरुवाथिरकली केरल का एक प्रसिद्ध पारंपरिक लोक नृत्य है, जिसे आमतौर पर महिलाएं वृत्त बनाकर समूह में प्रस्तुत करती हैं। हालांकि, व्यावसायिक आउटलेट के भीतर इस प्रकार रील बनाने और नृत्य करने के स्थान के चयन पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।
वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए एक वर्ग ने सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह के व्यवहार को नागरिक बोध (Civic Sense) की कमी करार दिया है। एक्स पर वीडियो साझा करने वाले कई उपयोगकर्ताओं का तर्क है कि विदेशों में व्यावसायिक परिसरों के भीतर इस तरह की गतिविधियां अन्य ग्राहकों के लिए असुविधाजनक हो सकती हैं और विदेशों में भारतीय समुदाय की छवि को प्रभावित करती हैं। कुछ आलोचनात्मक टिप्पणियों में यह भी कहा गया है कि जूते पहनकर पारंपरिक नृत्य का अभ्यास करना सांस्कृतिक परंपरा के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाता है।
वहीं, दूसरी ओर कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने महिला का बचाव करते हुए इसे एक निर्दोष सांस्कृतिक अभिव्यक्ति बताया है। समर्थकों का कहना है कि महिला के इस संक्षिप्त नृत्य से किसी अन्य ग्राहक को कोई असुविधा या रुकावट उत्पन्न नहीं हुई। समर्थकों के अनुसार सार्वजनिक स्थानों को हर समय पूरी तरह गंभीर बनाए रखने की आवश्यकता नहीं है, जब तक कि किसी के आचरण से दूसरों को प्रत्यक्ष परेशानी न हो रही हो।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस क्लिप को लेकर विवाद गहराने के बावजूद वीडियो पर लगातार जुड़ाव बढ़ रहा है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, इस वायरल वीडियो पर अब तक हजारों रिपोस्ट और प्रतिक्रियाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सार्वजनिक अनुशासन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर बहस जारी है।
स्रोत: economictimes.indiatimes.com · timesofindia.indiatimes.com · aajtak.in




