उत्तराखंड के ग्रामीण अंचल से आने वाले कंटेंट क्रिएटर पूरन चंद द्वारा इंस्टाग्राम पर अपलोड की गई व्लॉग श्रृंखला ने सोशल मीडिया पर मासिक धर्म (पीरियड्स) से जुड़ी परंपराओं पर एक बार फिर तीखी बहस छेड़ दी है। साझा किए गए वीडियो में पूरन चंद की पत्नी को पीरियड्स के दौरान पहाड़ी मकान के एक अलग कमरे में एकांतवास में रहते हुए दिखाया गया है। वीडियो के एक दृश्य में व्लॉगर कमरे के बाहर बैठी अपनी पत्नी की ओर बिस्किट का पैकेट दूर से फेंकता नजर आ रहा है, वहीं अन्य दृश्यों में उसकी पत्नी फर्श पर अलग बैठकर भोजन करती दिखाई दे रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह वीडियो तेजी से प्रसारित हुआ, जिसके बाद बड़ी संख्या में यूजर्स ने इस प्रथा की आलोचना की और इसे ‘मासिक धर्म से जुड़ी छुआछूत’ करार दिया। वीडियो पर बढ़ती प्रतिकूल टिप्पणियों के बाद व्लॉगर ने एक और सफाई वीडियो जारी किया। इस वीडियो में उसने अपनी पत्नी से सवाल किया कि ‘पीरियड्स में अलग क्यों रखा जाता है?’, जिस पर पत्नी ने उत्तर दिया कि उसे खुद इसका कोई तार्किक कारण नहीं मालूम। इसके बाद पूरन चंद ने कहा कि उत्तराखंड ‘देवभूमि’ है और यहां देवी-देवताओं व मंदिरों से जुड़ी सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं का पालन किया जाता है।
सफाई देते हुए व्लॉगर ने कहा कि उनका परिवार जानबूझकर ऐसा नहीं कर रहा, बल्कि कई पीढ़ियों से उनके पूर्वज इन रीतियों का पालन करते आ रहे हैं। उसने कहा कि ग्रामीण परिवेश में रहने के कारण वे पुरानी परंपराओं से बंधे हुए हैं और चाहकर भी इनका विरोध करने की स्थिति में नहीं हैं। व्लॉगर ने यह तर्क भी दिया कि अगर वे शहर में रहते तो ऐसी पाबंदियां नहीं होतीं। इस पर उसकी पत्नी ने भी कहा कि शहरों में इन बातों पर इतना ध्यान नहीं दिया जाता।
चौथे दिन के एक वीडियो में व्लॉगर ने अपनी पत्नी के स्नान करने के बाद कहा, “आज इसने नहा लिया है, अब यह इंसानों को छू सकती है।” इस व्लॉग श्रृंखला पर प्रतिक्रिया देते हुए एक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता ने लिखा, “पीरियड्स महिला को अशुद्ध नहीं बनाते, लेकिन उसे अछूत की तरह रखना हमारी सोच को दर्शाता है।” वहीं व्लॉगर पूरन चंद ने अपनी सफाई में कहा कि वे इन रीतियों से घिरे हुए हैं और सार्वजनिक रूप से इन्हें दिखाने में कोई झिझक महसूस नहीं करते।




