सुप्रीम कोर्ट ने 2 जुलाई 2026 को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से उत्पन्न फर्जी/अस्तित्वहीन न्यायिक मिसालों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) व नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (NCLAT) के आदेश रद्द कर दिए। बार एंड बेंच व लाइव लॉ के अनुसार, न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि ऐसी ‘हेल्यूसिनेटेड’ सामग्री पर आधारित कोई भी निर्णय विधि की दृष्टि में टिक नहीं सकता और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रहार करता है।
पीठ ने निर्देश दिया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) एक समिति गठित कर वकीलों द्वारा अदालतों में फर्जी या AI-जनित उद्धरण प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति की जांच कर आवश्यक मानक तय करे। बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने न्यायिक तंत्र में ऐसी सामग्री के उपयोग पर ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाने की बात कही और स्पष्ट किया कि बिना स्वतंत्र सत्यापन के AI-आधारित उद्धरण स्वीकार्य नहीं हैं।
मामला एक दिवाला विवाद से जुड़ा था जिसमें NCLT, मुंबई के आदेश और उसे बरकरार रखने वाला NCLAT का निर्णय चुनौती के दायरे में था। बार एंड बेंच व लाइवमिंट के मुताबिक, यह विवाद एसेल इंफ्राप्रोजेक्ट्स और जम्मू-कश्मीर बैंक से जुड़े ऋण मामले के संदर्भ में उठा, जहां निचली अदालतों ने गैर-मौजूद या AI-जनित मिसालों पर भरोसा किया था।
बिज़नेस स्टैंडर्ड ने बताया कि सर्वोच्च अदालत ने आदेश देते हुए कहा कि ‘हेल्यूसिनेटेड’ सामग्री न्यायनिर्णयन की विश्वसनीयता पर “कैटस्ट्रॉफिक” (विनाशकारी) असर डालती है। अदालत ने कुछ उद्धरणों का उदाहरण देते हुए संकेत किया कि वे वास्तविक सुप्रीम कोर्ट रिपोर्ट्स में मौजूद ही नहीं थे, फिर भी निचली अदालती फैसलों में उन्हें आधार बनाया गया।
लाइव लॉ के अनुसार, शीर्ष अदालत ने इस आधार पर NCLT और NCLAT—दोनों के आदेश निरस्त किए और मामले को तथ्यों व विधि के सत्यापित आधार पर दोबारा सुनवाई के लिए वापस भेजा। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि न्यायालय AI का सहायक के रूप में उपयोग कर सकते हैं, परंतु निर्णय-प्रक्रिया पर मनुष्यों का पूर्ण नियंत्रण रहेगा।
लॉ ट्रेंड के मुताबिक, पीठ ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि विवादित दिवाला याचिका पर त्वरित सुनवाई कर निर्धारित समयसीमा में नया आदेश पारित किया जाए, साथ ही BCI को वकीलों के लिए अनुशासनात्मक मानक व सत्यापन-प्रोटोकॉल पर विचार करने को कहा गया।
इस फैसले पर कानूनी मंचों और तकनीक समुदाय में व्यापक बहस देखी गई। बार एंड बेंच की रिपोर्ट में पीठ का यह कथन उद्धृत है कि फर्जी/AI-जनित मिसालों का न्यूनतम भी असर किसी निर्णय को अवैध बना देता है—और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर शून्य सहिष्णुता अपनाई जाएगी।
स्रोत: www.barandbench.com · www.livelaw.in · www.business-standard.com · lawtrend.in




