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Politics

राम मंदिर दान जांच तेज: SIT पांच साल का ऑडिट फिर करेगी, ट्रस्ट सदस्य–कोषाध्यक्ष के बयान

राम मंदिर दान अनियमितता मामले में SIT पिछले पाँच वर्षों का पुनः ऑडिट कराएगी। ट्रस्ट सदस्य ने सरकारी कार्रवाई का समर्थन किया, जबकि कोषाध्यक्ष ने नकदी गिनती में अपनी भूमिका से इनकार किया।

फोटो साभार: economictimes.indiatimes.com

राम मंदिर दान अनियमितता मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने ट्रस्ट के खातों का पिछले पांच वर्षों का पुनः ऑडिट कराने का निर्णय लिया है। आर्थिक समय के अनुसार, यह कदम प्रारंभिक जांच निष्कर्षों के बाद उठाया गया है और मामले की वित्तीय पड़ताल को व्यापक दायरे में ले जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया कि SIT ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेनदेन और प्रक्रियाओं की पुनर्समीक्षा करेगी।

हिंदुस्तान टाइम्स ने सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया कि SIT जांच का दायरा ट्रस्ट के गठन (5 फ़रवरी 2020) से अब तक के समूचे वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र तक बढ़ा दिया गया है। उसी रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट की आंतरिक प्रस्तुति में 1 अप्रैल 2025 से 28 फ़रवरी 2026 के बीच ₹82.78 करोड़ दान प्राप्त होने की सूचना दी गई, जबकि लगभग ₹2,100 करोड़ निर्माण व्ययों के बाद बैंकों में सावधि जमा के रूप में बताए गए।

मामले पर ट्रस्ट पदाधिकारियों की सार्वजनिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। लाइवमिंट के मुताबिक, ट्रस्ट के एक सदस्य महंत दिनेन्द्र दास महाराज ने सरकार की कार्रवाई का समर्थन करते हुए इसे ‘उचित’ बताया और कड़ी सज़ा की बात कही। यह बयान 5 जुलाई को आया, जब जांच एजेंसियां आरोपितों से पूछताछ और वित्तीय दस्तावेजों के सत्यापन को आगे बढ़ा रही थीं।

उधर, आउटलुक इंडिया के अनुसार, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने 5 जुलाई को स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि नकदी दान की गिनती या उसकी भौतिक हैंडलिंग में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका नहीं रही। उन्होंने कहा कि दान गणना की प्रक्रियाएं संस्थागत तौर पर संचालित होती हैं और वे अपने वित्तीय दायित्वों तक सीमित रहे।

आर्थिक समय ने यह भी रिपोर्ट किया कि SIT की पुनः ऑडिट कवायद, पहले चरण में मिली प्रक्रियागत कमियों—जैसे नकदी गणना, परिसंपत्तियों के सत्यापन और निगरानी तंत्र—को ध्यान में रखकर आगे बढ़ेगी। इसी क्रम में संदिग्ध लेनदेन, कर्मचारियों की आय-व्यय प्रोफाइल और संबंधित खातों की फॉरेंसिक जांच की जाएगी।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जुलाई को SIT को 15 दिन का अतिरिक्त समय मिला था, जिसके बाद टीम फिर से अयोध्या पहुंचकर पूछताछ और रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अगले चरण में पांच वर्षीय पुनः ऑडिट की रूपरेखा के तहत खाताबही, बैंक स्टेटमेंट और आंतरिक नियंत्रण तंत्र का मिलान किया जाएगा।

स्रोत: economictimes.indiatimes.com · www.hindustantimes.com · www.livemint.com · www.outlookindia.com