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Politics

मॉनसून 35% घटा: PM ने मंत्रालयों को आकस्मिक योजना पर निर्देश दिए, सतर्क रहने को कहा

वर्षा घाटा 35% होने पर PM ने 1 जुलाई को समीक्षा में मंत्रालयों को समन्वित आकस्मिक योजनाएं तैयार रखने को कहा; IMD ने जुलाई में भी सामान्य से कम वर्षा का अनुमान जताया।

फोटो साभार: indiatoday.in

देश में मॉनसून की धीमी रफ्तार और वर्षा घाटा बढ़ने के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े सूत्रों के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 जुलाई 2026 को हुई समीक्षा में संबंधित मंत्रालयों को समन्वित आकस्मिक (कंटिन्जेंसी) योजनाएं तैयार रखने के निर्देश दिए। इंडिया टुडे के अनुसार, 4 जून से 2 जुलाई 2026 के बीच देश में औसत बारिश सामान्य से 35% कम दर्ज हुई है और भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जुलाई में भी सामान्य से कम वर्षा का अनुमान जताया है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने कृषि, खाद्य, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, जल शक्ति, ऊर्जा, पशुपालन और वित्त सहित लगभग 10 मंत्रालयों/विभागों को स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। यह निर्देश IMD के मासिक आउटलुक के बाद आए हैं, जिसमें जुलाई 2026 में देशव्यापी बारिश सामान्य से नीचे रहने की संभावना बताई गई।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की ‘मॉनसून ट्रैकर’ रिपोर्ट में IMD महानिदेशक मृत्युंजय मोहापात्र के हवाले से बताया गया कि जून में एल नीनो की स्थिति ने वर्षा गतिविधि को दबाया, जबकि इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) तटस्थ रहने से भरपाई नहीं हो सकी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जुलाई के आगे के हिस्सों में बरसात की रफ्तार सुधरने की उम्मीद है, पर कुल मिलाकर मासिक औसत सामान्य से कम रह सकता है।

देवडिस्कोर्स/एएनआई-स्रोत आधारित रिपोर्टों में यह बैठक कैबिनेट स्तर की समीक्षा के संदर्भ में बताई गई है, जहां प्रधानमंत्री ने विभागों को ‘मिलकर काम’ करने और प्रभावित क्षेत्रों—विशेषकर कृषि, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन—के लिए अग्रिम तैयारी पर जोर दिया।

उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में, कमजोर मॉनसून का असर कुमाऊं-गढ़वाल के वर्षा-निर्भर खेती क्षेत्रों, जलस्रोतों की उपलब्धता और हाइड्रो पावर उत्पादन पर पड़ सकता है। राज्य सरकारें आमतौर पर केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राहत व कृषि विस्तारण उपाय अपनाती हैं; हालांकि, नवीनतम राज्य-स्तरीय कदमों का आधिकारिक ब्यौरा अभी प्रकाशित नहीं किया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश की कमी से खरीफ बुवाई की रफ्तार प्रभावित हो सकती है और यदि हालात बने रहते हैं तो बीज, चारा, सूखा-रोधी फसलों के पैकेज तथा पेयजल आपूर्ति प्रबंधन जैसे कदम सक्रिय करने पड़ सकते हैं। केंद्र के ताजा निर्देश इसी संभावित जोखिम को देखते हुए समयपूर्व तैयारी पर बल देते हैं।

स्रोत: www.indiatoday.in · www.financialexpress.com · www.devdiscourse.com