रविवार‑सोमवार (27–28 जुलाई 2026) की कार्यवाही में मानसून सत्र में संसद के दोनों सदन बार‑बार उपद्रव के चलते स्थगित रहे, जबकि लोकसभा में केंद्र द्वारा प्रस्तुत ‘‘Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026’’ पर लंबी और तीखी बहस हुई। हिंदुस्तान टाइम्स के लाइव कवरेज के अनुसार लोकसभा ने बिल पर छह घंटे का समय आवंटित किया और सदन में विपक्ष और सरकार के बीच आरोप‑प्रत्यारोप चले।
NDTV की लाइव रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा में विपक्ष ने छात्रों के रुझान और जंतर‑मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई को बार‑बार उठाया; कुछ विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री से पुलिस कार्रवाई और कथित रूप से इस्तेमाल की गई कठोर साधनों की स्पष्टीकरण की मांग की। सरकारी पक्ष ने बिल को ‘‘पेपर‑लीक रोकने’’ के लिए आवश्यक क़दम बताते हुए उसका बचाव किया, जबकि विपक्ष ने इसे ‘‘लॉग ऑफ़ फैक्ट’’ बताकर प्रशासनिक विफलता का इलाज कहा।
दोनों संसदीय स्रोतों के अनुसार, चर्चा के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने छात्रों पर कथित पुलिस क्रूरता और पेटलेट‑गन के इस्तेमाल के सवाल उठाए; सरकार ने मामले की जांच और जल्द सुधार के आश्वासन दिए। हिंदुस्तान टाइम्स ने यह भी रिपोर्ट किया कि कुछ सांसदों ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के हालिया त्याग‑पत्र का जिक्र करते हुए इस मुद्दे पर सरकार की जवाबदेही पर तीखे शब्द कहे।
NDTV ने बताया कि राज्यसभा की कार्यवाही भी विरोध के कारण कई बार बाधित रही और ऊपरी सदन को 29 जुलाई को सुबह 11:00 बजे पुनः बुलाने का आदेश दिया गया; इसी बीच विपक्ष ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विश्राम‑काल और तत्क्षण चर्चा की मांगें कीं। दोनों समाचार संस्थानों के लेखों में यह बात दर्ज है कि संसद के गतिरोध से कई विधायी कार्य प्रभावित हुए और संसद में ‘‘एंटी‑पेपर‑लीक’’ बिल की पारित‑प्रक्रिया पर असमंजस बना रहा।
प्रकाशित कवरेज के अनुसार (हिंदुस्तान टाइम्स, NDTV), मानसून सत्र की आगामी बैठकें कल (29 जुलाई) को पुनः आयोजित होंगी और सदन के एजेंडा में इस बिल तथा छात्रों के विरुद्ध हुई पुलिस कार्रवाई पर आगे की बहस प्रमुख रूप से शामिल रहेगी।
स्रोत: www.hindustantimes.com · www.ndtv.com · timesofindia.indiatimes.com




