उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को उधम सिंह नगर जिले के खटीमा स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर खटीमा गोलीकांड के शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। 1 सितंबर 1994 को हुए खटीमा गोलीकांड की बरसी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किए और अमर बलिदानियों के परिजनों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि खटीमा की पावन धरती उत्तराखंड राज्य आंदोलन की जननी और तपोभूमि है। उन्होंने खटीमा गोलीकांड में अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीद भगवान सिंह सिरौला, प्रताप सिंह, रामपाल, सलीम अहमद, गोपीचंद, धर्मानंद भट्ट और परमजीत सिंह को याद करते हुए कहा कि उत्तराखंड का प्रत्येक नागरिक उनके त्याग का सदैव ऋणी रहेगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस संघर्ष ने ही पृथक उत्तराखंड राज्य निर्माण के आंदोलन को नई दिशा दी थी।
राज्य आंदोलनकारियों के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का कानूनी प्रावधान लागू किया है। इसके साथ ही सरकार ने इस आरक्षण व्यवस्था का विस्तार करते हुए इसमें चिन्हित आंदोलनकारियों की परित्यक्ता, विधवा और तलाकशुदा पुत्रियों को भी शामिल करने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने आंदोलनकारियों की मासिक पेंशन में की गई वृद्धि का ब्योरा भी साझा किया। उनके वक्तव्य के अनुसार, राज्य आंदोलनकारियों की सामान्य पेंशन को बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रति माह किया गया है, जबकि जेल गए व घायल आंदोलनकारियों की पेंशन 7,000 रुपये कर दी गई है। इसके अलावा सक्रिय आंदोलनकारियों को 5,500 रुपये और गंभीर रूप से दिव्यांग आंदोलनकारियों को 6,000 रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि चिन्हित आंदोलनकारियों को विशेष पहचान पत्र जारी करने के साथ 98 आंदोलनकारियों को अब तक राजकीय सेवा में नियोजित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों की अन्य लंबित मांगों पर विचार करने के लिए गठित मंत्रिमंडल की उपसमिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके प्राप्त होते ही आगे के फैसले लिए जाएंगे।




