हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित कथित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में गतिरोध तेज हो गया है। 1 सितंबर 2026 को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने देहरादून स्थित राज्य सचिवालय का घेराव करने के लिए विरोध मार्च निकाला।
सुभाष रोड पर पुलिस द्वारा लगाए गए सुरक्षा बैरिकेड्स पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस बल के बीच तीखी झड़प हुई। इस दौरान पूर्व राज्य मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, जांच के बाद उनकी स्थिति स्थिर बताई गई है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य समेत कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में लिया।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि 8 अगस्त को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद मैदान का कथित रूप से शुद्धिकरण और हवन कराना एक दलित नेता का अपमान है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि यह कृत्य सामाजिक समानता और संवैधानिक चेतना के विपरीत है, और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
इसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अनुसूचित जाति मोर्चे ने देहरादून के दर्शन लाल चौक स्थित पंचायती मंदिर में ‘बुद्धि-शुद्धि यज्ञ’ का आयोजन किया। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का चित्र रखकर अनुष्ठान किया और आरोप लगाया कि कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले जनता के बीच भ्रम और जातिगत वैमनस्य फैलाने की कोशिश कर रही है।
बीजेपी एससी मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष बलबीर घुनियाल के अनुसार, रामलीला मैदान में हुआ कार्यक्रम एक सामान्य स्वच्छता अभियान था, जिसमें वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों ने स्वयं हिस्सा लिया था। इस बीच उत्तराखंड कांग्रेस के महासचिव अमरजीत सिंह ने ऐलान किया है कि पार्टी इस मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर 7 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री आवास की ओर विरोध मार्च निकालेगी।
स्रोत: www.indiatoday.in · indianexpress.com



