भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वर्ष 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत राज्य की उन 23 विधानसभा सीटों के लिए विशेष माइक्रो-मैनेजमेंट रणनीति लागू की है, जिन पर पार्टी को 2022 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। इस रणनीति के तहत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, पूर्व मुख्यमंत्रियों और सांसदों समेत पार्टी के शीर्ष नेताओं को इन हारी हुई सीटों का संगठनात्मक प्रभार सौंपा गया है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उनकी पारंपरिक सीट खटीमा का प्रभार दिया गया है, जहां 2022 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट को हरिद्वार जिले की मुस्लिम बहुल पिरान कलियर सीट की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिस पर भाजपा 2012 के बाद से जीत दर्ज नहीं कर पाई है। वहीं गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी को बद्रीनाथ सीट और प्रदेश संगठन महामंत्री कुंदन परिहार को हरिद्वार ग्रामीण सीट के प्रबंधन का जिम्मा दिया गया है।
पार्टी ने राज्य की दो ऐसी सीटों—चक्रता और धारचूला, जहां भाजपा ने राज्य गठन के बाद से कभी जीत हासिल नहीं की है—के लिए भी विशेष प्रभारी नियुक्त किए हैं। चक्रता सीट का प्रभार पार्टी की प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत और धारचूला सीट का जिम्मा वरिष्ठ नेता गणेश भंडारी को सौंपा गया है। इसके अतिरिक्त पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत को भी अन्य कमजोर विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने का कार्य सौंपा गया है।
2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 47 सीटों पर जीत हासिल कर सत्ता बरकरार रखी थी, जबकि विपक्ष में कांग्रेस ने 19, बहुजन समाज पार्टी ने 2 और निर्दलीयों ने 2 सीटों पर कब्जा किया था। बीजेपी प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार के मुताबिक, यह अभियान आगामी विधानसभा चुनावों तक जारी रहेगा और सभी प्रभारी नेता आवंटित क्षेत्रों का दौरा कर बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ चुनावी रणनीति बनाएंगे।




