
देहरादून। उत्तराखंड को अक्सर प्राकृतिक आपदाओं की भूमि के रूप में देखा जाता है। बादल फटना, भूस्खलन, ग्लेशियर टूटना, अचानक बाढ़ और पर्वतीय क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना यहां प्रशासन के लिए हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन अब पहली बार उत्तराखंड की पहचान केवल आपदाओं से प्रभावित राज्य के रूप में नहीं, बल्कि आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने वाले मॉडल राज्य के रूप में भी स्थापित हो रही है।
हाल ही में BRICS मंच पर उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल की सराहना की गई। विशेष रूप से सिलक्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन और धराली आपदा प्रबंधन अभियान का उल्लेख करते हुए राज्य की कार्यप्रणाली को एक सफल उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
यह केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की उस संस्थागत क्षमता की अंतरराष्ट्रीय मान्यता है जिसे पिछले एक दशक में लगातार विकसित किया गया है।
आपदाओं के साथ जीने वाला राज्य
उत्तराखंड का भूगोल जितना सुंदर है, उतना ही संवेदनशील भी है।
2013 की केदारनाथ आपदा ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हजारों लोगों की जान गई और राज्य की आपदा तैयारी पर गंभीर सवाल उठे। इसके बाद राज्य सरकार, आपदा प्रबंधन विभाग, SDRF, NDRF और अन्य एजेंसियों ने अपनी क्षमता को लगातार मजबूत करने पर ध्यान दिया।
आज उत्तराखंड उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जहां आपदा प्रबंधन केवल राहत कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्व चेतावनी, त्वरित प्रतिक्रिया, समन्वय और तकनीकी सहायता को भी समान महत्व दिया जाता है।
सिलक्यारा ऑपरेशन: दुनिया ने देखा उत्तराखंड का धैर्य
सिलक्यारा टनल हादसा केवल उत्तराखंड नहीं बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय बन गया था।
टनल के भीतर फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान कई दिनों तक चला। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों, इंजीनियरों, सेना, NDRF और SDRF के बीच अभूतपूर्व समन्वय देखने को मिला।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इतने लंबे और जटिल अभियान के बावजूद सभी श्रमिकों को जीवित बाहर निकाल लिया गया। यही कारण है कि सिलक्यारा ऑपरेशन को आज दुनिया के सबसे सफल सुरंग बचाव अभियानों में गिना जाता है।
धराली: एक नई परीक्षा
सिलक्यारा के बाद धराली क्षेत्र में आई आपदा ने राज्य की आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली की एक और परीक्षा ली।
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित पहुंच और लगातार खराब मौसम के बावजूद प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों को तेजी से संचालित किया। विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और स्थानीय प्रशासन की सक्रियता ने प्रभावित क्षेत्रों तक सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
BRICS मंच पर धराली अभियान का उल्लेख यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय केवल बड़े अभियानों को नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर किए गए प्रभावी प्रबंधन को भी महत्व दे रहा है।
उत्तराखंड मॉडल की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार उत्तराखंड मॉडल की सबसे बड़ी ताकत इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन है।
पहले जहां विभिन्न विभाग अलग-अलग काम करते थे, वहीं अब SDRF, पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, सेना, ITBP, NDRF और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिलता है।
आपदा की स्थिति में समय सबसे महत्वपूर्ण संसाधन होता है। उत्तराखंड ने पिछले वर्षों में इसी समय को कम करने पर सबसे अधिक काम किया है।
तकनीक ने बदली तस्वीर
राज्य में मौसम पूर्वानुमान, रियल टाइम मॉनिटरिंग, ड्रोन सर्विलांस, सैटेलाइट डेटा और संचार नेटवर्क का उपयोग लगातार बढ़ा है।
पहाड़ी क्षेत्रों में जहां हर मिनट महत्वपूर्ण होता है, वहां तकनीक के उपयोग ने निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज बनाया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल तकनीकी नवाचारों के कारण और अधिक मजबूत हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय मान्यता क्यों महत्वपूर्ण है?
BRICS मंच पर मिली सराहना केवल एक प्रतीकात्मक उपलब्धि नहीं है।
इसका अर्थ है कि उत्तराखंड के अनुभवों को अब वैश्विक स्तर पर अध्ययन योग्य मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। विभिन्न देशों के बीच आपदा प्रबंधन से जुड़े अनुभवों के आदान-प्रदान में उत्तराखंड का नाम शामिल होना राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि है।
यह राज्य के अधिकारियों, SDRF कर्मियों, तकनीकी विशेषज्ञों और हजारों फ्रंटलाइन कर्मचारियों के वर्षों के प्रयासों की भी मान्यता है।
चुनौतियां अभी भी बाकी हैं
हालांकि इस उपलब्धि के बावजूद चुनौतियां समाप्त नहीं हुई हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तराखंड में चरम मौसम की घटनाएं बढ़ रही हैं। ग्लेशियर झीलों का खतरा, बादल फटना, भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी घटनाएं भविष्य में और जटिल हो सकती हैं।
इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य को केवल आपदा प्रतिक्रिया पर नहीं बल्कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण और जलवायु अनुकूल विकास मॉडल पर भी ध्यान देना होगा।
BRICS मंच पर उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल की सराहना राज्य के लिए गर्व का विषय है। यह दिखाता है कि 2013 की त्रासदी से सबक लेने के बाद उत्तराखंड ने अपनी संस्थागत क्षमता को मजबूत किया है और आज वह केवल आपदाओं से जूझने वाला राज्य नहीं, बल्कि उनसे प्रभावी ढंग से निपटने वाला राज्य भी बन रहा है।
सिलक्यारा और धराली जैसे अभियानों ने यह साबित किया है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी समन्वय, तकनीक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के बल पर जीवन बचाए जा सकते हैं। यही कारण है कि आज उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है।
