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Crime

पानी मांगने के बहाने घर में घुसा मनसब अली, 11 साल की मासूम से छेड़छाड़

देहरादून (विकासनगर): उत्तराखंड के विकासनगर क्षेत्र से एक बार फिर हिन्दू समाज की बेटियों की सुरक्षा और जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ बरोटीवाला क्षेत्र में एक 11 साल की हिंदू बच्ची को घर में अकेली पाकर मनसब अली नाम के एक युवक ने जबरन प्रवेश किया और उसके साथ छेड़छाड़ की। हालांकि, बच्ची की माँ की सतर्कता से आरोपी को मौके पर ही रंगे हाथों पकड़ लिया गया, जिसके बाद स्थानीय हिंदू संगठनों की मदद से उसे पुलिस के हवाले किया गया। देहरादून पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरोपी मनसब अली के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है।

यह शर्मनाक घटना बीते गुरुवार की शाम को घटित हुई, जब आरोपी मनसब अली पीड़ित हिंदू परिवार के घर के बाहर पहुँचा और दरवाजा खटखटाया। उस समय बच्ची के पिता गंभीर रूप से बीमार थे और उसकी माँ घर के अंदरूनी हिस्से में उनकी देखभाल में व्यस्त थीं। मासूम बच्ची ने जब दरवाजा खोला तो उसने आरोपी को बताया कि उसके माता-पिता अभी व्यस्त हैं, लेकिन मनसब अली ने सोची-समझी रणनीति के तहत पानी मांगने का बहाना बनाया। जैसे ही मासूम उसके लिए पानी लेने के लिए अंदर गई, आरोपी चुपके से उसके पीछे कमरे में घुस गया और उसके प्राइवेट पार्ट्स को छूते हुए अभद्र हरकतें करने लगा। बच्ची के चिल्लाने की आवाज सुनकर जब माँ दौड़कर कमरे में पहुँची, तो उन्होंने मनसब अली को रंगे हाथों पकड़ लिया और शोर मचाना शुरू कर दिया।

माँ की आवाज सुनकर आसपास के स्थानीय लोग और पड़ोसी तुरंत मौके पर एकत्र हो गए। इसी बीच घटना की सूचना मिलते ही बजरंग दल के प्रखंड अध्यक्ष विपिन वर्मा भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ पीड़ित परिवार के घर पहुँचे। आक्रोशित स्थानीय निवासियों और हिंदू कार्यकर्ताओं ने मिलकर आरोपी को दबोचा और तत्काल विकासनगर कोतवाली पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने मामले की गंभीरता और क्षेत्र में फैलते तनाव को देखते हुए फौरन कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।

स्थानीय हिंदू संगठनों और निवासियों का आरोप है कि उत्तराखंड के शांत मैदानी और पहाड़ी इलाकों में एक विशेष समुदाय के लोगों की बढ़ती आबादी और इस तरह की विकृत मानसिकता के मामलों में सीधा संबंध देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य के भीतर बाहरी राज्यों से आकर बिना किसी वैध सत्यापन के रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों, रेहड़ी-पटरी लगाने वालों और कबाड़ियों द्वारा स्थानीय हिंदू नाबालिगों को निशाना बनाने की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। इससे पहले साल 2023 में उत्तरकाशी के पुरोला में एक नाबालिग हिंदू लड़की के अपहरण के प्रयास के बाद पूरे जिले में ‘लव जिहाद’ और तेजी से होते जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर बड़े पैमाने पर आंदोलन हुए थे, जिसके बाद मुस्लिम व्यापारियों को वहां से पलायन तक करना पड़ा था।

इसी तरह विकासनगर, पछवादून और सहसपुर की इस पूरी बेल्ट में पहले भी विशेष समुदाय के कबाड़ियों और संदिग्ध मजदूरों द्वारा स्थानीय बच्चियों को बहला-फुसलाकर भगाने और धार्मिक पहचान छिपाकर दोस्ती करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। कुमाऊं के प्रवेश द्वार माने जाने वाले हल्द्वानी और रुद्रपुर के इलाकों में भी पिछले वर्षों में ऐसी कई घटनाएं रिपोर्ट की गई थीं, जिनमें पकड़े गए अधिकांश आरोपी रोहिंग्या या बाहरी राज्यों से आए मुस्लिम थे, जो बिना किसी पुलिस सत्यापन के अवैध बस्तियों में रह रहे थे।

विकासनगर की इस ताजा घटना के बाद एक बार फिर हिंदू समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। संगठनों का साफ कहना है कि फेरीवालों, कबाड़ियों और पानी या रास्ता पूछने के बहाने हिंदू घरों की रेकी करने वाले संदिग्ध तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि उत्तराखंड सरकार लगातार व्यापक स्तर पर ‘सत्यापन अभियान’ चलाने के निर्देश देती रही है, लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि जमीनी स्तर पर अभी भी सुरक्षा और सतर्कता को लेकर बड़ी चूक हो रही है। हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि बाहरी और संदिग्ध तत्वों का पूर्ण बहिष्कार और कड़ा पुलिस सत्यापन नहीं हुआ, तो देवभूमि की जनसांख्यिकी और बेटियों की सुरक्षा पूरी तरह खतरे में पड़ जाएगी।