उत्तराखंड में राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (यूएसएएमई) के तहत अनिवार्य मान्यता और शैक्षणिक मानकों का पालन न करने वाले 107 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद कर दिया गया है। संबंधित जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों की ओर से सौंपी गई जांच रिपोर्टों के आधार पर राज्य अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने यह कार्रवाई की है। इस प्रशासनिक कार्रवाई के तहत बंद किए गए 107 मदरसों में से सर्वाधिक 102 संस्थान अकेले हरिद्वार जिले में स्थित हैं, जबकि 5 अन्य मदरसे उधम सिंह नगर जिले में हैं।
हरिद्वार के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी चंद्र प्रकाश रावत द्वारा राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को भेजी गई आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में बिना वैध दस्तावेजों और बिना मान्यता संचालित 102 मदरसों का संचालन बंद कराया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पूर्व में भंग किए गए मदरसा बोर्ड से जुड़े 76 मदरसों के आवेदन शिक्षा विभाग के पास मान्यता के लिए विचाराधीन हैं। इसके अतिरिक्त हरिद्वार में 45 मदरसे पूर्व से ही राज्य शिक्षा विभाग के अंतर्गत पंजीकृत हैं और अपनी प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।
धामी सरकार ने राज्य में मदरसा शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के उद्देश्य से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2016 को भंग कर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया था। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम, 2025 तथा अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान मान्यता नियमावली, 2026 के अंतर्गत राज्य के सभी छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों को नए प्राधिकरण से पंजीकरण और मान्यता लेना अनिवार्य कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व में घोषणा की थी कि राज्य के सभी अल्पसंख्यक संस्थानों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत आधुनिक और रोजगारपरक पाठ्यक्रम पढ़ाना अनिवार्य होगा।
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, उधम सिंह नगर में कुल 119 मदरसों में से 5 बंद कराए गए हैं और 60 संस्थानों ने अब तक मान्यता का आवेदन प्रस्तुत नहीं किया है। वहीं नैनीताल के 18 मदरसों में से केवल 12 ने मान्यता के लिए आवेदन दिया है। प्राधिकरण के अध्यक्ष सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों से अंतिम स्थिति रिपोर्ट मांगी गई है, जिसके प्राप्त होते ही राज्यभर में शेष गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों पर नियमानुसार अगली कार्रवाई की जाएगी।
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