उत्तराखंड में वित्त वर्ष 2022-23 से जून 2026 तक विधायकों को आवंटित कुल 1,664 करोड़ रुपये की विकास निधि में से केवल 66 प्रतिशत राशि ही खर्च हो पाई है। काशीपुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता नदीम उद्दीन द्वारा ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय से जुटाई गई सूचना के अनुसार, प्रदेश के विधायकों की विकास निधि के लगभग 573 करोड़ रुपये बिना किसी इस्तेमाल के विभिन्न बैंक खातों में पड़े हुए हैं। राज्य में वर्ष 2027 की शुरुआत में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सामने आई इस रिपोर्ट ने प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है।
ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों के विधायक विकास निधि का उपयोग करने में मैदानी क्षेत्रों के विधायकों से सुस्त साबित हुए हैं। पर्वतीय जिलों में विधायकों द्वारा निधि खर्च का औसत प्रति विधानसभा क्षेत्र लगभग 14.74 करोड़ रुपये रहा, जबकि मैदानी जिलों में यह औसत 16.88 करोड़ रुपये तथा मिश्रित जिलों में 15.77 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसके अलावा, राज्य सरकार के पांच बड़े कैबिनेट मंत्री भी विधायक निधि के उपयोग की रफ्तार के मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पीछे रहे हैं।
दलीय आधार पर निधि उपयोग के आंकड़ों में विपक्षी दल कांग्रेस सत्तारूढ़ दल से आगे निकल गया है। आरटीआई के आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस विधायकों ने अपनी स्वीकृत निधि का औसतन 68.4 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया है, जबकि भाजपा विधायकों का औसत खर्च 64.4 प्रतिशत दर्ज किया गया है। वर्तमान विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के 47 और कांग्रेस के 20 विधायक हैं।
इस खुलासे के बाद भाजपा के वरिष्ठ विधायक विनोद चमोली ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण निधि के भुगतान में समय लगता है। विनोद चमोली के अनुसार, “विधायक निधि का पूरा खर्च न होना यह नहीं दर्शाता कि विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। किसी भी कार्य की स्वीकृति के बाद टेंडर प्रक्रिया और अन्य कागजी औपचारिकताएं पूरी होने में समय लगता है।” उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सत्ता पक्ष के विधायकों की विधानसभाओं में अन्य सरकारी योजनाओं का बजट भी खर्च होता है, जबकि विपक्षी विधायकों के पास प्राथमिक साधन विधायक निधि ही होता है।
स्रोत: www.etvbharat.com · atalexpressnews.com




