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Char Dham

बद्रीनाथ धाम के पास संगीत कार्यक्रम का वीडियो वायरल, तेज संगीत और मर्यादा पर छिड़ी बहस

बद्रीनाथ धाम के पास आयोजित सांस्कृतिक उत्सव में लाउड संगीत का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तीर्थ स्थल की मर्यादा और परंपराओं को लेकर बहस शुरू हो गई है।

फोटो साभार: indiatoday.in

उत्तराखंड के पवित्र बद्रीनाथ धाम परिसर के पास आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बद्रीनाथ स्थित टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में आयोजित ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल’ के दौरान लोक गायिका प्रियंका मेहर के म्यूजिकल शो का वीडियो सामने आने के बाद तीर्थ क्षेत्र की मर्यादा और तेज आवाज वाले संगीत के इस्तेमाल पर ऑनलाइन बहस छिड़ गई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दो दिवसीय उत्सव का आयोजन भारतीय सेना द्वारा जिला प्रशासन चमोली और उत्तराखंड पर्यटन विभाग के सहयोग से ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के तहत किया गया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य की लोक संस्कृति, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना था। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान लाउडस्पीकर पर तेज संगीत और मंच के पास लोगों के नृत्य करने के वीडियो इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर फैलने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने इस पर नाराजगी जताई।

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने बद्रीनाथ धाम जैसे प्रमुख तीर्थ स्थल के निकट इस प्रकार के डीजे-शैली के संगीत आयोजनों की अनुमति दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों ने तर्क दिया कि बद्रीनाथ धाम एक आध्यात्मिक साधना केंद्र है, जिसे व्यावसायिक पर्यटन स्थल की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। सोशल मीडिया चर्चाओं में यह भी रेखांकित किया गया कि बद्रीनाथ में शंख न बजाने की भी प्राचीन परंपरा रही है, ऐसे में अत्यधिक तेज आवाज में संगीत कार्यक्रम आयोजित करना धाम की शांति और परंपराओं के विपरीत है।

सोशल मीडिया पर इस विषय को उठाते हुए देहरादून के सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने कहा कि तीर्थ स्थलों की आध्यात्मिक गरिमा और शांति बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, ज्योतिर्पीठ से जुड़े स्वामी मुकुन्दानंद गिरि ने भी बयान जारी कर कहा कि पवित्र धामों में आयोजित कार्यक्रमों में गरिमा और मर्यादा का पालन किया जाना अनिवार्य है।

प्रशासन और आयोजकों के अनुसार, इस दो दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव में स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों और युवा उद्यमियों द्वारा पारंपरिक उत्पादों और व्यंजनों की बिक्री के लिए भी स्टॉल लगाए गए थे।

स्रोत: www.indiatoday.in · www.asianetnews.com