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Politics

कोटद्वार विवाद: जिम संचालक दीपक कुमार को सुप्रीम कोर्ट से राहत, FIR पर अंतरिम रोक

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के कोटद्वार विवाद से जुड़े जिम संचालक दीपक कुमार के खिलाफ दर्ज एफआईआर और सोशल मीडिया बैन संबंधी हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।

फोटो साभार: aajtak.in

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के कोटद्वार में दुकान के नाम को लेकर हुए विवाद में हस्तक्षेप करने वाले जिम संचालक दीपक कुमार उर्फ ‘मोहम्मद दीपक’ को बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने दीपक कुमार के खिलाफ दर्ज पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश के क्रियान्वयन पर भी रोक लगा दी, जिसमें याचिकाकर्ता को मामले से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट करने से प्रतिबंधित किया गया था।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की दो सदस्यीय पीठ ने 31 अगस्त 2026 को दीपक कुमार की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। पीठ ने याचिका पर उत्तराखंड सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई तक एफआईआर से जुड़ी सभी आपराधिक कार्यवाहियों पर रोक प्रभावी रहेगी।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ दंगे से संबंधित अपराध का कोई मामला नहीं बनता है। सिंघवी ने अदालत को बताया कि जनवरी 2026 में कोटद्वार में एक बुजुर्ग दुकानदार के समर्थन में आगे आने के कारण दीपक कुमार को आरोपी बना दिया गया। वरिष्ठ वकील ने सवाल उठाया कि किसी नागरिक द्वारा विवाद में मध्यस्थता करने के बाद उसके खिलाफ इस प्रकार की दंडात्मक एफआईआर दर्ज करना पूरी तरह अनुचित है।

यह मामला कोटद्वार में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं और एक स्थानीय दुकानदार के बीच दुकान के नाम को लेकर हुए विवाद से जुड़ा हुआ है। विवाद के दौरान दीपक कुमार द्वारा बीच-बचाव करने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया था। इसके बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 20 मार्च 2026 को एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज कर दी थी और दीपक कुमार को मामले पर सार्वजनिक या सोशल मीडिया बयान देने से बचने का निर्देश दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब उत्तराखंड राज्य सरकार को मामले में चार सप्ताह के भीतर अपना आधिकारिक जवाब दाखिल करना होगा।

स्रोत: www.thehindu.com · www.aajtak.in