उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद मंच का ‘शुद्धीकरण’ किए जाने का मामला तूल पकड़ गया है। इस घटना को लेकर राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक जंग छिड़ गई है। ‘श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास’ नामक संगठन के सदस्यों द्वारा हवन व पूजन कर शुद्धीकरण किए जाने के बाद दोनों दलों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस घटना पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे दलित समुदाय का अपमान करार दिया है। गणेश गोदियाल के अनुसार, मल्लिकार्जुन खरगे के दलित वर्ग से आने के कारण ही इस तरह का आयोजन किया गया, जो संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। गोदियाल ने आरोप लगाया कि शुद्धीकरण करने वाले संगठन के तार सत्तारूढ़ भाजपा से जुड़े हुए हैं। उन्होंने नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से मामले का संज्ञान लेकर जांच करने और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
दूसरी ओर, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए संबंधित संगठन से किसी भी प्रकार के जुड़ाव से इनकार किया है। प्रदेश सरकार के काबीना मंत्री और भाजपा प्रवक्ता खजान दास ने कहा कि रामलीला मैदान एक सांस्कृतिक और धार्मिक स्थल है, जहां रैली के दौरान ऐसे नारे लगाए गए जिससे सनातन धर्म के अनुयायियों की भावनाएं आहत हुईं। खजान दास के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी विवादित नारों से ध्यान भटकाने के लिए इस मुद्दे को जातिगत रंग देने की कोशिश कर रही है।
उल्लेखनीय है कि मल्लिकार्जुन खरगे ने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित कर आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के प्रचार अभियान का आगाज किया था। इसके दो दिन बाद 10 अगस्त को संबंधित संगठन ने मैदान में हवन किया था। पुलिस प्रशासन के अनुसार, पूरे मामले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थिति पर नजर रखी जा रही है और प्राप्त शिकायती पत्र के आधार पर प्राथमिक जांच शुरू की गई है।
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