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Politics

उत्तराखंड: 7,000 बीघा सरकारी जमीन लीज पर देने के विवाद पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने

उत्तराखंड कांग्रेस ने धामी सरकार पर 7,000 बीघा सरकारी जमीन निजी निवेशकों को 90 साल की लीज पर देने का आरोप लगाया। भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने दावों को बेबुनियाद बताया।

प्रतीकात्मक चित्र

देहरादून में 12 सितंबर को कांग्रेस की उत्तराखंड इकाई ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर लगभग 7,000 बीघा सरकारी जमीन निजी निवेशकों को 90 साल के लिए लीज पर देने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने एक संयुक्त पत्रकार वार्ता आयोजित कर सरकार के इस कदम को राज्य के दूरगामी हितों के खिलाफ बताया। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद और आगामी चुनाव से प्रेरित बताया है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पार्टी की ‘चार्जशीट’ समिति के अध्यक्ष करन माहरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि सरकार ‘उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड’ (UIIDB) के माध्यम से उद्यान व अन्य विभागों की कीमती जमीनों का लैंड बैंक बनाकर कॉरपोरेट घरानों को सौंप रही है। करन माहरा ने आरोप लगाया कि टेंडर में ₹500 करोड़ का वार्षिक टर्नओवर और ₹60 करोड़ की नेटवर्थ जैसी पात्रता शर्तें रखी गई हैं, जो केवल बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम नागरिकों के लिए आवासीय भूमि खरीद की सीमा 250 वर्गमीटर तय है, तब चुनिंदा कंपनियों को हजारों बीघा भूमि 90 साल की लीज पर देने का क्या औचित्य है।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लीजधारकों को जमीन सब-लीज करने और बैंकों से भारी ऋण लेने के लिए उसे गिरवी रखने की भी छूट दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मॉडल के जरिये राज्य के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। कांग्रेस नेताओं ने जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट परियोजना का उदाहरण देते हुए दावा किया कि सरकारी संसाधनों से विकसित संपत्तियों को भी कम दरों पर निजी हाथों में सौंपा गया है।

कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि विपक्ष वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विकास विरोधी माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है। महेंद्र भट्ट के अनुसार, वर्तमान में UIIDB के नाम पर केवल 18 हेक्टेयर भूमि पंजीकृत है। उन्होंने कहा कि बोर्ड नियमों के तहत अनुपयोगी सरकारी भूमि का आर्थिक उपयोग कर राज्य में निवेश, रोजगार और राजस्व बढ़ाने का काम कर रहा है।

महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट किया कि लीज मॉडल के तहत भूमि का अंतिम स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही सुरक्षित रहेगा और यह प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जा रही है।

स्रोत: theprint.in · www.jagran.com