उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश–भानियावाला चार/छह लेन सड़क परियोजना के लिए प्रस्तावित पेड़ों की कटाई को तत्काल प्रभाव से रोकने की घोषणा की। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह निर्णय तब तक लागू रहेगा जब तक सभी हितधारकों के साथ संवाद के जरिए व्यापक सहमति नहीं बनती। यह जानकारी 18 जुलाई की शाम को सार्वजनिक हुई। (बिजनेस स्टैंडर्ड/द प्रिंट हिंदी के अनुसार)
देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में बीते दिनों पर्यावरण समूहों व स्थानीय निवासियों ने विरोध दर्ज कराया था। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, विरोध 4,369 पेड़ों की प्रस्तावित कटान और 754 प्रतिरोपण के अनुमान को लेकर तेज हुआ था। (टाइम्स ऑफ इंडिया/डाउन टू अर्थ के अनुसार)
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन जनभावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों की अनदेखी कर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। द प्रिंट हिंदी के मुताबिक, उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया कि जनसहमति बनने तक पेड़ों का कटान स्थगित रहेगा। (द प्रिंट हिंदी के अनुसार)
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इसे ‘अस्थायी रोक’ बताते हुए कहा कि यह कदम सभी पक्षों—स्थानीय समुदाय, विशेषज्ञों और परियोजना प्राधिकरणों—से संवाद के लिए समय देने के उद्देश्य से लिया गया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि मुख्यमंत्री ने लगभग 3,000 पेड़ों की प्रस्तावित कटान का जिक्र किया। (बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार)
इधर, हाल के न्यायिक घटनाक्रम में टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया था कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह इस परियोजना पर दायर अवमानना याचिका खारिज की और कहा कि कटान पर कोई अंतरिम रोक प्रभाव में नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पूर्व आदेशों में रोक का विस्तार नहीं हुआ था। (टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार)
परियोजना के पक्ष में तर्क देते हुए प्राधिकरणों ने पहले कहा था कि मौजूदा दो-लेन मार्ग पर यातायात घनत्व अधिक है और वन्यजीव सुरक्षा उपाय—जैसे अंडरपास/कल्वर्ट—प्रस्तावित हैं। डाउन टू अर्थ ने 17 जुलाई को बताया कि एनएचएआई ने यातायात आंकड़ों और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का हवाला देते हुए स्पष्टीकरण जारी किया था। (डाउन टू अर्थ के अनुसार)
मुख्यमंत्री धामी के ताजा निर्देश के बाद अगला कदम हितधारकों के साथ औपचारिक संवाद और विकल्पों की समीक्षा बताया गया है। सरकार ने कहा है कि जनसहमति बनने तक पेड़ों की कटाई नहीं होगी। (बिजनेस स्टैंडर्ड/द प्रिंट हिंदी के अनुसार)
स्रोत: www.business-standard.com · timesofindia.indiatimes.com · hindi.theprint.in · www.downtoearth.org.in




