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Politics

जिलों से दुनिया तक, कैसे ODOP ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की दिशा बदली

लंबे समय तक उत्तर प्रदेश को भारत की राजनीति का केंद्र तो माना गया, लेकिन आर्थिक रूप से उसकी पहचान एक ऐसे राज्य की रही जहाँ अपार संभावनाएँ होने के बावजूद विकास बिखरा हुआ था। भदोही के कालीन, मुरादाबाद का पीतल, कन्नौज का इत्र और बनारसी साड़ी जैसे उत्पाद दुनिया भर में पहचान रखते थे लेकिन इन उत्पादों को बनाने वाले कारीगर और छोटे उद्यमी स्वयं आर्थिक असुरक्षा में जी रहे थे। राज्य में लाखों पारंपरिक उद्योग मौजूद थे, पर वे असंगठित थे, आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहायता से दूर थे। अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि और पलायन के संदर्भ में देखी जाती थी, जबकि युवा पीढ़ी पारंपरिक व्यवसाय छोड़ रही थी। इन्हीं कारणों से उत्तर प्रदेश लंबे समय तक “BIMARU” राज्य की छवि से जुड़ा रहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से “वोकल फॉर लोकल” और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान देने की बात करते रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कई मंचों से यह कहा कि उत्तर प्रदेश का विकास केवल बड़े शहरों और औद्योगिक कॉरिडोर के सहारे संभव नहीं है, बल्कि हर जिले की अपनी आर्थिक पहचान को मजबूत करना होगा। इसी सोच के साथ 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में विकास की एक नई दिशा दिखाई दी, जिसमें जिलों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी विकास का आधार बनाने का प्रयास किया गया। इसी क्रम में 2018 में “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” यानी ODOP योजना की शुरुआत हुई। शुरुआत में इसे एक सामान्य सरकारी योजना की तरह देखा गया था, लेकिन धीरे धीरे यह उत्तर प्रदेश की आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।

ODOP ने उत्तर प्रदेश के जिलों को केवल प्रशासनिक इकाइयों के रूप में नहीं, बल्कि आर्थिक इकाइयों के रूप में देखना शुरू किया। भदोही को “कार्पेट हब”, मुरादाबाद को “ब्रास सिटी”, कन्नौज को “परफ्यूम कैपिटल” और फिरोजाबाद को “ग्लास सिटी” के रूप में स्थापित करने की कोशिश हुई। 

2017-18 में जब यह योजना शुरू हुई, तब उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात लगभग 88 हजार करोड़ रुपये के आसपास था। अगले कुछ वर्षों में यह बढ़कर करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया। विभिन्न सरकारी और औद्योगिक रिपोर्टों के अनुसार इस वृद्धि में ODOP आधारित उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। योजना के माध्यम से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला, 1 लाख से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षण और आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराए गए। शरद कोहली जैसे आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में MSME सेक्टर को लेकर जो नई ऊर्जा दिखाई दी, उसमें ODOP की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की एक खास बात यह रही कि उसने इस योजना को केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रहने दिया। ODOP को निवेश सम्मेलनों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों और डिजिटल मार्केट प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया। पहले जिन उत्पादों को केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित माना जाता था, वे अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और वैश्विक प्रदर्शनियों तक पहुँचने लगे हैं। Amazon, Flipkart और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर हजारों ODOP उत्पाद उपलब्ध हैं। इससे छोटे कारीगरों और उद्यमियों को पहली बार बड़े बाजारों तक सीधी पहुँच मिलने लगी।

इस योजना ने एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया, इसने विकास की चर्चा को बड़े शहरों से निकालकर जिलों तक पहुँचा दिया। उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक आर्थिक गतिविधियों का केंद्र कुछ चुनिंदा शहर रहे। लेकिन ODOP ने यह संदेश दिया कि विकास केवल नोएडा, लखनऊ या कानपुर तक सीमित नहीं रह सकता। यदि सही नीति और बाजार उपलब्ध हो, तो एक छोटा जिला भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन सकता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने ODOP को केवल ब्रांडिंग तक सीमित नहीं रखा। वित्तीय सहायता, कौशल विकास, डिजाइन इनोवेशन, पैकेजिंग, GI टैगिंग और निर्यात प्रोत्साहन पर भी विशेष जोर दिया गया। आज उत्तर प्रदेश, देश के उन राज्यों में शामिल है जिनके पास सबसे अधिक GI टैग वाले उत्पाद हैं। इससे स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान मिली है और कारीगरों को बेहतर बाजार उपलब्ध हुआ है।

हालाँकि, ODOP की सफलता के बावजूद कई चुनौतियाँ अब भी मौजूद हैं। कई जिलों में योजना का प्रभाव सीमित रहा है। कुछ उत्पादों को बाजार मिला, जबकि कुछ अब भी संघर्ष कर रहे हैं। डिजाइन इनोवेशन, गुणवत्ता नियंत्रण और वैश्विक पैकेजिंग मानकों पर अभी काफी काम किया जाना बाकी है। 

फिर भी, यह स्वीकार करना पड़ेगा कि ODOP ने उत्तर प्रदेश की आर्थिक छवि को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लंबे समय तक उत्तर प्रदेश को केवल श्रमिकों के स्रोत के रूप में देखा जाता था, अब उसे उत्पादों और स्थानीय उद्योगों के केंद्र के रूप में भी देखा जाने लगा है। 

आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था किस दिशा में जाएगी, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि ODOP जैसे मॉडल कितनी गहराई से स्थानीय उद्योगों को वैश्विक बाजारों से जोड़ पाते हैं। यदि राज्य अपने पारंपरिक उत्पादों को केवल सांस्कृतिक विरासत नहीं, बल्कि आधुनिक आर्थिक संपत्ति के रूप में विकसित कर सका, तो यह मॉडल उत्तर प्रदेश को भारत की सबसे बड़ी उपभोक्ता अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ाकर एक मजबूत निर्यातक राज्य में बदल सकता है।