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Perspective

एम्स दिल्ली में लगा ‘पॉपुलेशन क्लॉक’ वायरल, हर सेकेंड बदलती दिखी भारत की आबादी

दिल्ली एम्स के बाहर लगा 'पॉपुलेशन क्लॉक' सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सेकेंड-दर-सेकेंड बदलती आबादी के आंकड़ों ने भारत की जनसंख्या वृद्धि को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के बाहर स्थापित एक डिजिटल ‘पॉपुलेशन क्लॉक’ (जनसंख्या घड़ी) का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर भारत की अनुमानित आबादी का आंकड़ा लगातार हर सेकेंड बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। 4 सितंबर 2026 को रिकॉर्ड किए गए वीडियो में भारत की आबादी का आंकड़ा 1,47,92,39,016 (लगभग 1.48 अरब) दर्ज किया गया था, जो लगातार ऊपर की ओर बढ़ता नजर आया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर इस वीडियो के सामने आने के बाद नेटिजन्स के बीच यह धारणा बनने लगी कि एम्स दिल्ली को देश में जन्म लेने वाले हर बच्चे की जानकारी तुरंत मिल रही है। हालांकि, रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यह डिजिटल बोर्ड किसी लाइव बर्थ-ट्रैकिंग सिस्टम से जुड़ा नहीं है। यह आंकड़ा जनसांख्यिकीय अनुमानों और सांख्यिकी मॉडल पर आधारित है, जिसे दीर्घकालिक जन्म और मृत्यु दर के आधार पर तैयार किया गया है।

एशियानेट न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ‘पॉपुलेशन क्लॉक’ स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की जन-जागरूकता पहल का हिस्सा है। इसका उद्देश्य नागरिकों और नीति-निर्माताओं को देश की तीव्र जनसंख्या वृद्धि और जनसांख्यिकीय बदलावों के प्रति जागरूक करना है। इस बोर्ड पर दिखाई देने वाले आंकड़े वास्तविक समय का हेडकाउंट नहीं हैं, बल्कि यह एक गणितीय मॉडल के जरिए आबादी में होने वाले बदलाव की अनुमानित गति को प्रदर्शित करता है।

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भारत की बढ़ती आबादी, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार, आवास और प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ने वाले दबाव को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। भारत में अंतिम आधिकारिक जनगणना वर्ष 2011 में आयोजित की गई थी, जिसके बाद से देश की जनसांख्यिकीय नीति और योजनाएं नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) तथा नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS) के जरिए जुटाए गए डेटा और अनुमानों पर आधारित हैं।

नागरिक पंजीकरण प्रणाली के तहत भारत में जन्म और मृत्यु का आधिकारिक रिकॉर्ड स्थानीय निकायों और रजिस्ट्रार कार्यालयों के माध्यम से दर्ज किया जाता है। केंद्र सरकार की ओर से जारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफाइल के दिशानिर्देशों के अनुसार, आधिकारिक जनगणना डेटा के अभाव में ऐसे जनसंख्या प्रक्षेपण (Population Projections) ही विभिन्न सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे के नियोजन के लिए प्राथमिक आधार बनते हैं।

स्रोत: www.indiatimes.com · www.asianetnews.com